सरकार ने भारत की Suzlon energy यात्रा को अगले चरण में बढ़ाने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। अब भारत का फोकस ना सिर्फ नई मेगावॉट क्षमता जोड़ने पर है, बल्कि सिस्टम सुधार और स्थिर बिजली सप्लाई पर है। अभी तक भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता 35 गीगावॉट थी, जो अब बढ़कर 2025 तक 242.78 गीगावॉट (हाइड्रो को छोड़कर) हो चुकी है। भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावॉट नॉन-फॉसिल ईंधन बेस्ड बिजली उत्पादन करना है।
ऑफशोर विंड और नई परियोजनाएं
सरकार अब ऑफशोर विंड एनर्जी पर खास जोर दे रही है। Suzlon energy पहले से ऑनशोर (जमीन पर) विंड टर्बाइन का सबसे बड़ा निर्माता है और अब ऑफशोर प्रोजेक्ट जैसे नए क्षेत्रों में ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ गई है। हाल ही में सुजलॉन को टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी से 838 मेगावॉट का सबसे बड़ा ऑर्डर मिला है, जो तीन राज्यों में लगाया जाएगा। इसके अलावा कंपनी की ऑर्डर बुक 5.7 गीगावॉट तक पहुंच गई है, जिससे भविष्य में कंपनी की आमदनी और ग्रोथ के अच्छे संकेत हैं।
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ग्रिड इंटीग्रेशन, पम्प्ड स्टोरेज और नई स्कीमें
सरकार ग्रिड स्ट्रेंथ बढ़ाने, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) जैसी तकनीकों पर काम कर रही है। इससे बिजली सप्लाई लगातार रहने लगेगी और प्रोजेक्ट्स अटकेंगे नहीं। इससे Suzlon energy जैसी कंपनियों के लिए डिमांड में मजबूती आएगी।
मैन्युफैक्चरिंग और सरकारी सपोर्ट
आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत PLI स्कीम, डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट और ड्यूटी छूट से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट मिल रहा है। Suzlon energy एक पूरी तरह भारतीय कंपनी है, जिससे उसे इन स्कीमों का सीधा लाभ मिलेगा। सरकार ने हाल ही में भू-तापीय (जियोथर्मल) नीति भी शुरू की है, जिससे नयी ऊर्जा तकनीकों में निवेश बढ़ेगा।
ताजा कंपनी नतीजे और ऑर्डर बुक डाटा
Q2 FY2025 में Suzlon energy की नेट प्रॉफिट साल दर साल 97% बढ़कर ₹2.01 अरब पहुँच गई है। कंपनी की कुल आमदनी Q2 में 48% बढ़कर ₹21.21 अरब हो गई। कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 5.7 GW है, जिसमें पीएसयू व सरकारी ऑर्डर 75% से ज्यादा हिस्सा रखते हैं। सुजलॉन ने नई टर्बाइन सीरीज के लिए 10 नई प्रोडक्शन लाइन्स भी शुरू की हैं और देशभर में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 4500 मेगावॉट तक पहुंचा दी है।
आगे का फोकस और सेक्टर का माहौल
भारत सरकार की नीति अब टिकाऊ, स्थिर और ग्रिड-इंटीग्रेटेड ऊर्जा इकोसिस्टम बनाने पर है। इसके चलते ग्रीन एनर्जी कंपनियों में निवेशकों का भरोसा और सेक्टर सेंटिमेंट मजबूत हो रहा है। सरकार के सिस्टम और नीतियों में ताजा बदलाव का सीधा फायदा सुजलॉन जैसी विंड एनर्जी कंपनियों तक पहुंच रहा है, जिससे उनमें फंडिंग, ऑर्डर और ग्रोथ के नए मार्ग खुल रहे हैं।
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